Notice: Function is_home was called incorrectly. Conditional query tags do not work before the query is run. Before then, they always return false. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 3.1.0.) in /home/l93y487memcp/public_html/alokastrology.com/blog/wp-includes/functions.php on line 6121
माइग्रेन के दर्द का आयुर्वेदिक इलाज - Blog

माइग्रेन के दर्द का आयुर्वेदिक इलाज

माइग्रेन

आजकल इतना कम्पटीशन हैं कि हर कोई अपनी जगह बनाने के लिए दौड़े जा रहा है और दिन रात काम करता है। इस दिन रात के काम के चलते उनपर स्ट्रेस बढ़ जाता है, उनका लाइफस्टाइल बिगड़ जाता है और बेसमय खाने पीने की आदत की वजह से उसकी सेहत पर भी असर पड़ने लगता है। अत्यधिक तनाव के  कारण उन्हें कई परेशानियों होने लगती हैं जिसमे से प्रमुख है सिरदर्द। ये सिरदर्द कई तरह का हो सकता है। कई बार ये आसानी से दवा खाने से या थोड़ी से मसाज से या सिर दबाने से दूर हो जाता है लेकिन कई बार ये सिरदर्द (माइग्रेन) दो से तीन दिन तक चलता जाता है। रिसर्च के अनुसार ये बीमारी पुरुषो की तुलना में महिलाओं को ज्यादा होती है।  कई महिलाएं इसे 18 से 49 साल तक झेलती रहती हैं। 

जाने घुटनों में दर्द का आयुर्वेदिक इलाज। जानिए आयुर्वेद का ज्योतिष से क्या संबंध है। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी श्री आलोक खंडेलवाल जी से ऑनलाइन ज्योतिष परामर्श बुक करें.

माइग्रेन के दर्द के कारण

  • कई लोगो को माइग्रेन की परेशानी दूध से बनाए प्रोडक्ट्स को खाने से हो सकती है। 
  • कई बार ऐसे प्रोडक्ट्स को खाने से ये दर्द शुरू हो जाता है जिसमे सलफेट ज्यादा होता है। इसके सेवन से व्यक्ति की ब्लड कैपिलरीज डाइलेट होने से मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है और माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाता है। 
  • ये दर्द कई बार होर्मनल चेंजेस से या बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने से या बाहर के प्राकृतिक वातावरण के कारण भी हो सकता है।
  • कई बार नींद पूरी न होने की वजह से या देर से सोने से भी ये परेशानी होने लगती है।

माइग्रेन का दर्द नार्मल सिरदर्द से ज्यादा पेनफुल होता है। वैसे तो दवाई खाकर और थोडा सा बाम आदि लगाकर इसे कम किया जा सकता है लेकिन जैसे ही दवाई का असर कम होने लगता है माइग्रेन सिरदर्द फिर से होने लगता है। इस दर्द को मिटाने के लिए आप आयुर्वेदिक उपायों का सहारा ले सकते है। आयुर्वेदिक उपायों से आपको कुछ ही दिनों में बहुत आराम आ जाएगा।

माइग्रेन का इलाज जाने उससे पहले इसके लक्ष्ण जान लेते हैं। इन लक्षणों को देखकर आपको पता चल जाएगा कि आपको मामूली सिरदर्द है या माइग्रेन का दर्द।

माइग्रेन के लक्ष्ण

  • सिर में तेज दर्द होना।
  • उल्टी जैसा लगना या उल्टी आना।
  • आँखों में जलन महसूस होना।
  • पूरे सिर में दर्द न होकर किसी एक हिस्से में दर्द होना।
  • दर्द के साथ साथ चक्कर आना।
  • चिड़चिड़ापन आ जाना।
  • आँखों से धुंधला दिखना।

माइग्रेन से बचने के आयुर्वेदिक घरेलु उपाय

जो व्यक्ति माइग्रेन के दर्द को बार बार नही झेलना चाहता है उसे अपनी जीवनशैली को बदलना ही होगा। रोज बहुत सारा पानी पीने के साथ साथ कुछ घरेलू उपाय भी अपनाने होंगे।

  • जायफल का पेस्ट – आयुर्वेद अनुसार जायफल एक ऐसा अद्भुत मसाला है जो भारतीय किचन में जरुर मौजूद होता है। इस मसाले में दिमाग को स्ट्रेस फ्री रखने और उसे शांत बनाए रखने का गुण होता है।  कह सकते हैं ये मसाला मसाला नही औषधीय गुणों से भरी हुई कोई खान है। इसे इस्तेमाल करने के लिए कच्चे दूध में थोडा सा जायफल का पाउडर मिलाए और मिक्स करे। अब इस मिक्सचर को माथे पर और कान के पीछे लगाए। इससे यदि मसाज की जाए तो व्यक्ति को तुरंत ही आराम आ जाता है। इससे सिरदर्द तो दूर होगा ही साथ ही व्यक्ति को बढ़िया नींद भी आएगी।
  •  पेपरमिंट तेल – विशेषज्ञो के अनुसार सिर दर्द को मात्र पेपरमिंट तेल की  खुशबू से दूर किया जा सकता है। पिपरमिंट के तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है जो हमारी नसों को आराम देता है। इस खुशबू से व्यक्ति को माइग्रेन की वजह से होने वाली उल्टी और मतली भी दूर हो जाती है। रोगी पिम्पेर्मेंट के तेल की खुशबू सूंघकर या इसके तेल से सिर की मसाज करके इस्तेमाल किया जा सकता है। सिरदर्द में व्यक्ति को अदरक डालकर बनाई गई चाय भी आराम देती है।
  • तिल का तेल– यदि व्यक्ति को बहुत ज्यादा माइग्रेन का दर्द हो रहा है तो उसे नाक में कुछ बूँदें तिल के तेल की डालनी चाहिए। इस उपाय से व्यक्ति का मेंटल स्ट्रेस कम होता है क्योकि वात जिससे स्ट्रेस लेवल बढ़ता है वो तिल के तेल के उपाय से कम होने लगता है। आयुर्वेद डॉक्टर्स के अनुसार जिन व्यक्तियों को वात दोष होता है  उनका स्ट्रेस लेवल बढने लगता है और माइग्रेन शुरू हो जाता है। अत: ये उपाय माइग्रेन को दूर करने में बहुत फायदेमंद है। इस उपाय से गैस से दिमाग पर हो रहा स्ट्रेस भी कम होने लगता है और व्यक्ति की बॉडी और माइंड रिलैक्स होने लगता है।
  • पथ्यादि काढ़ा – आयुर्वेद में पथ्यादि काढ़े का बहुत महत्व है। इसे बनाने के लिए कई तरह के हर्ब्स, फूल और पौधों से मिलाकर तैयार किया जाता है। इस आयुर्वेदिक काढ़े में पेन-रिलीविंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो माइग्रेन का दर्द कम करने में बहुत  लाभकारी होता है। इस काढ़े के सेवन से व्यक्ति को बहुत आराम मिलता है और उसे नींद भी आने लगती है। ये काढ़ा आयुर्वेदिक स्टोर में आसानी से मिल जाता है।

यदि आप भी माइग्रेन से ग्रस्त हैं तो इन उपायों को अपनाकर देखे और अगर आप किसी अनुभवी और विशेषज्ञ आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करे.

माइग्रेन के दर्द का आयुर्वेदिक इलाज
Scroll to top